झारखंड में 20 से 28 फीसदी वोट पाकर भी बनते हैं सांसद











जीत के दावे और जश्न का संसार अनोखा है। जीतने के बाद जो बयान आते हैं, उस पर लोग गौर नहीं फरमाते। लोग केवल जीत को जानते हैं। जीतनेवाले से कोई नहीं पूछता कि उसे जीत कैसे मिली। झारखंड के चुनाव परिणामों पर गौर फरमाएं तो पता चलता है कि इसका गणित कुछ और ही है। ज्यादातर उम्मीदवार मतदाताओं की कुल संख्या का 20 से 28 फीसदी वोट पाकर लोकसभा पहुंचते हैं। आमतौर पर वे अपने ही लोकसभा क्षेत्र के बहुमत का भी प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।


झारखंड की 14 लोकसभा सीटों के 2014 के चुनाव परिणाम पर गौर करें तो वोटों का गणित साफ हो जाता है। झारखंड से जीतनेवाले 14 में आठ प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें अपने क्षेत्र के कुल वोटरों का 25 से 28 फीसदी वोट मिला और वह सांसद बन गए। वहीं, छह ऐसे भी प्रत्याशी हैं, जिन्हें मात्र 20 से 25 फीसदी वोटरों ने पसंद किया। इनमें सबसे ज्यादा मत 28.03 प्रतिशत विजय हांसदा ने प्राप्त किया था। वहीं, सबसे कम 20.25 प्रतिशत मत सुदर्शन भगत को मिले थे। 2014 के पहले के चुनाव परिणाम देखें तो कमोबेश यही स्थिति दिखाई देती है। सभी 14 विजयी उम्मीदवारों को मिले वोटों के प्रतिशत का औसत निकालें तो यह 25.30 प्रतिशत होता है।


लोकसभा के सभी 14 संसदीय क्षेत्रों में औसतन 60 से 65 फीसदी वोट पड़ते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में पूरे राज्य में 63.81 फीसदी वोट पड़े। राज्य के कुल दो करोड़ तीन लाख 49 हजार 796 मतदाताओं में से एक करोड़ 29 लाख 86 हजार 625 मतदाताओं ने मत डाला था।


अब जरा लोकसभा के क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल मतदाता और उसके उम्मीदवारों को मिले मतों का प्रतिशत देखें तो आप कह सकते हैं कि आधी तो क्या एक चौथाई वोटरों के द्वारा ही प्रतिनिधि चुने जाते हैं। झारखंड में लोकसभा की सभी 14 सीटों का विवरण देखने से इसका पता चलता है।


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